हिन्दु से मुस्लिम बनकर् बंगाल का पहला राजा बना...!!!
हिन्दु से मुस्लिम बनकर् बंगाल का पहला राजा बना...!!!
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| मुर्शिद कुली खान ( B.1665-D.30 june 1727) (बंगाल के प्रथम नवाब /राजा) |
मुग़ल कालीन बंगाल प्रांत की अगर समीक्षा की जाए तो आप पाएंगे यहा उस दौर मे भी आबादी काफी घनी बसी हुई थी। जिसके कारण रोज़गार का आभाव और गरीबी का आलम हमेशा से ही पूरे बंगाल प्रांत पर हावी रहा है। इसी के चलते बंगाल के अंडर देह व्यापार से लेकर दास व्यापार का चलन काफी प्रचलन मे आया। गरीबी मे वहा के लोग अपने बच्चो तक को बड़े ज़मींदारो या छोटी रियासतो के नवाबो को बेच देते थे। शारीरिक बलिष्ठा को देखते हुए उन्हे या तो घरेलु नौकर या दास बनाकर काम लिया जाता था या फिर उनको युद्ध के लिए तैयार किया जाता था।
ऐसे ही गरीबी की मार झेल रहे एक ब्राह्मण हिन्दु परिवार ने अपने बेटे (सूर्य नारायण मिश्रा) को हाजी शफी इस्फहनी को सन 1670 मे बेच दिया। हाजी शफी ने सबसे पहले इस बच्चे का खतना करवाकर मुस्लिम बनाया और इस बच्चे का नाम मुर्शीद कुली खान कर दिया।
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| मुर्शिद कुली खान ( B.1665-D.30 june 1727) |
शफी की मृत्यु के बाद, उसने ( मुर्शीद कुली खान ) विदर्भ के दीवान के अधीन काम किया, उस दौरान मुर्शिद कुली खान ने उसकी तत्कालीन सम्राट औरंगजेब का ध्यान आकर्षित किया,औरंगजेब मुर्शिद की टैक्स कलेक्शन और पॉलिसी इम्प्लीमेंटेशन की कला से बेहद प्रभावित हुए और जिसके चलते उसे बंगाल में दीवान (प्रधानमंत्री ) बना दिया। औरंगज़ेब जब तक जीवित रहा तब तक सब ठीक रहा।लेकिन 1707 मे औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद हालत बदलने लगे। औरंगजेब ने अपने जीवित रहते हुए ही अपने बेटों को अलग अलग प्रांत का सूबेदार या सेनानायक बना कर पोस्टिंग कर दी थी। बंगाल प्रांत की देखरेख औरंज़ेब ने अपने तीसरे बेटे आजम शाह को सोप रखी थी,आजम शाह को बंगाल का 26वा सूबेदार बनाया गया था।उसका कार्यकाल 1677-1680 तक रहा। औरंगज़ेब एक बोहोत ही मांझा हुआ शाशक था। वो राजनीतिक और युद्धिक रणनीती बनाने मे माहिर था। आप मुग़ल इतिहास उठाकर देखेंगे कि हर पीड़ी मे बेटा बाप की राज गद्दी हथियाने को आतुर रहता था। लेकिन औरंगजेब के शाशन मे ऐसा नहीं हो सका। क्युकि वो जिस भी प्रांत मे युद्ध जीतता था उसके बाद अपने किसी ना किसी बेटे या उसके पोते को वहा का सूबेदार बना कर उसी प्रांत मे भेज देता था। इससे होता ये था कि केंद्रीय गद्दी पर हमेशा औरंगज़ेब का ही अधीपत्या रहता था। बाकी उसके बेटे और पोते सेनापति बनाकर अपने प्रांत का कर कलेक्शन और प्रांत की समस्याओ मे ही उलझ कर रह जाते थे। आप ऊपर देखिये आज़म शाह को मात्र तीन साल के लिए ही बंगाल का सूबेदार बनाया गया । सूबेदार के तबादले कर दिये जाते थे जिससे वो स्थापित होकर बड़ी शक्ति के साथ उभर ना सके।
औरंगज़ेब की मृत्यु के बाद उसका बेटा बहादुर शाह जफ़र -1 को दिल्ली की गद्दी पर बैठ जाता है। लेकिन बहादुर शाह ज़फर 1 अपने पिता की तरह उतना काबिल शाशक नहीं था। जिसके चलते उसके अपने भाइयो और बच्चो के बीच सूबेदारी और सत्ता हथियााने के लिए साजिशे खून खराबा होते रहता था।बहादुर शाह ज़फर -1 खुद 9 बच्चो का बाप था तो यक़ीनन है सभी बच्चो को और भाइयो को एडमिन करना मुश्किल काम था। वापस आते है मुर्शिद कुली खान पर ,जो कि बंगाल के दीवान थे। औरंगज़ेब के मरते ही बहादुर शाह जफ़र का एक बेटा जिसका नाम अजीम-उश-शान मिर्जा था वो बंगाल प्रांत पर हमला कर देता है ताकि वो वहा का शाशक बन सके ।
हलाकि वो युद्ध मे मुर्शिद कुली खान से हार जाता है ।लेकिन उसके बाद् बहादुर शाह ज़फर 1 ,मुर्शिद को ढक्कन का सूबेदार बना देते है।
बहादुर शाह ज़फर 1 के बाद उसका बेटा जहांदार शाह(1712-1713) हिंदुस्तान का मुग़ल सम्राट बन जाता है इसने यहां 1712-1713 तक राज्य किया। लेकिन वो केवल एक साल ही शाशन कर पाता है। उसके बाद फ़र्रुख़ सियर दिल्ली की राजगद्दी पर बैठ जाता है इसने 1713 से 1719 तक हिंदुस्तान पर हुकूमत की। इसके शाशंकाल मे मुर्शिद कुली खान को वापस बंगाल का सूबेदार बना दिया जाता है। इसके बाद मुर्शिद भाप लेता है कि केंद्र मे मुग़ल सरकार अब सिर्फ नाम की सरकार है और वो खुद को बंगाल का नवाब ( राजा) घोषित कर देता है और मुग़लो से नाता तोड़ देता है। इसके बाद मुर्शिद ने कुछ छोटी मोटी आंतरिक विद्रोह के चलते कुछ लड़ाईया लड़ी जिसमे वो हमेशा विजित् रहा।
मुर्शीद कोली खान 1727 में मर गया। उसके बाद उसके दमाद शुजाउद्दीन ने बंगाल पर 1739 तक शासन किया । उसके बाद उसकी जगह पर उसका बेटा सरफराज खान आया जिसे उसी साल गद्दी से हटाकर अली खा नवाब बन गया।


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